इसरो चंद्रयान-4 और शुक्रयान-1: भारत की अगली ऐतिहासिक अंतरिक्ष छलांग और वैज्ञानिक आयाम
1. चंद्रयान-4: चंद्रमा से सैंपल-रिटर्न की बहु-चरणीय रणनीति
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक दक्षिणी ध्रुव लैंडिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने अगले मील के पत्थर चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) को केंद्रीय कैबिनेट से ₹2,104.06 करोड़ के बजट के साथ स्वीकृत कराया है। यह भारत का पहला लूनर सैंपल-रिटर्न मिशन होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर उतरना, वहां की मिट्टी व पत्थरों के नमूने एकत्र करना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। इस मिशन का लक्षित प्रक्षेपण वर्ष 2028 निर्धारित किया गया है।
2. मिशन की जटिल तकनीक व 5 मॉड्यूल
चंद्रयान-4 एक अभूतपूर्व मिशन है जिसमें एक साथ 5 अलग-अलग मॉड्यूल शामिल होंगे:
- एसेंडर मॉड्यूल (Ascender Module): चंद्रमा की सतह से नमूने लेकर लूनर ऑर्बिट में उड़ान भरेगा।
- डिसेंडर मॉड्यूल (Descender Module): चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग और सैंपलिंग करेगा।
- प्रोपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module): अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से चंद्रमा तक ले जाएगा।
- ट्रांसफर मॉड्यूल (Transfer Module): ऑर्बिट में सैंपल्स को कैप्सूल में ट्रांसफर करेगा।
- री-एंट्री मॉड्यूल (Re-entry Module): सैंपल्स को लेकर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और सुरक्षित पैराशूट लैंडिंग करेगा।
यह पूरा मिशन LVM3 हेवी-लिफ्ट रॉकेट के माध्यम से दो अलग-अलग प्रक्षेपणों में भेजा जाएगा और अंतरिक्ष में इनकी डॉकिंग की जाएगी।
3. वीनस ऑर्बिटर मिशन (शुक्रयान-1) व भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन
कैबिनेट ने इसके साथ ही शुक्र ग्रह के वातावरण, सतह और ज्वालामुखीय गतिविधियों के अध्ययन हेतु ₹1,236 करोड़ के वीनस ऑर्बिटर मिशन (VOM / Shukrayaan-1) को मंजूरी दी है, जिसे मार्च 2028 में प्रक्षेपित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 2028 तक भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (BAS-1) के पहले मॉड्यूल के प्रक्षेपण को भी मंजूरी मिल चुकी है।