यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) 2024: संपूर्ण संपादकीय विश्लेषण, पात्रता व परीक्षा उपयोगी बिंदु
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व समिति की सिफारिशें
भारत सरकार ने वर्ष 2004 में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को समाप्त कर राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) लागू की थी, जो बाजार-आधारित अंशदायी योजना थी। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग को देखते हुए अप्रैल 2023 में पूर्व वित्त सचिव (वर्तमान कैबिनेट सचिव) डॉ. टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति की व्यापक सिफारिशों और कर्मचारी यूनियनों के साथ परामर्श के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 24 अगस्त 2024 को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को औपचारिक स्वीकृति दी। यह योजना 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी।
2. यूपीएस (UPS) के पांच प्रमुख आधारभूत स्तंभ (Key Pillars)
- सुनिश्चित पेंशन (Assured Pension): सेवानिवृत्ति से पूर्व पिछले 12 महीनों के दौरान प्राप्त औसत मूल वेतन (Basic Pay) का 50% आजीवन पेंशन के रूप में सुनिश्चित किया गया है। इसके लिए न्यूनतम अर्हक सेवा 25 वर्ष अनिवार्य है। 10 वर्ष से 25 वर्ष के बीच सेवा करने वालों को आनुपातिक (Proportionate) पेंशन प्राप्त होगी।
- न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन (Assured Minimum Pension): यदि किसी कर्मचारी ने कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी की है, तो उसे प्रतिमाह न्यूनतम ₹10,000 की पेंशन अवश्य प्राप्त होगी।
- पारिवारिक पेंशन (Family Pension): किसी कर्मचारी के निधन की स्थिति में उसके आश्रित पति/पत्नी को कर्मचारी की अंतिम आहरित पेंशन का 60% पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलेगा।
- महंगाई राहत (Dearness Relief - DR): पेंशनभोगियों को मुद्रास्फीति से सुरक्षा प्रदान करने हेतु औद्योगिक श्रमिकों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आधार पर समय-समय पर महंगाई राहत (DR) देय होगी।
- एकमुश्त ग्रेच्युटी अतिरिक्त भुगतान (Lump-sum Benefit): ग्रेच्युटी के अतिरिक्त, प्रत्येक 6 माह की पूर्ण सेवा के लिए मूल वेतन + डीए का 1/10वां हिस्सा एकमुश्त सेवानिवृत्ति लाभ के रूप में दिया जाएगा, जिससे पेंशन राशि में कोई कटौती नहीं होगी।
3. वित्तीय ढांचा व सरकारी अंशदान
एनपीएस (NPS) में कर्मचारी 10% और सरकार 14% योगदान करती थी। यूपीएस (UPS) में कर्मचारियों का अंशदान 10% पर अपरिवर्तित रहेगा, जबकि केंद्र सरकार का अंशदान 14% से बढ़ाकर 18.5% कर दिया गया है। पहले वर्ष में सरकार पर लगभग ₹6,250 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। वर्तमान एनपीएस कर्मचारियों तथा 2004 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी यूपीएस में शामिल होने का एकमुश्त विकल्प दिया गया है।