तीन नए आपराधिक कानून 2024 (BNS, BNSS, BSA): ऐतिहासिक सुधार, प्रमुख धाराएं व परीक्षा बिंदु
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व पुराने कानूनों का प्रतिस्थापन
ब्रिटिश काल के 160 वर्ष पुराने आपराधिक कानूनों को आधुनिक, नागरिक-केंद्रित और न्याय-आधारित बनाने हेतु भारत की संसद ने दिसंबर 2023 में तीन ऐतिहासिक विधेयक पारित किए, जिन्हें राष्ट्रपति की सहमति के उपरांत 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू किया गया:
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS): इसने 1860 के भारतीय दंड संहिता (IPC) का स्थान लिया। इसमें कुल 358 धाराएं हैं (IPC में 511 थीं)।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS): इसने 1973 के दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) का स्थान लिया। इसमें 531 धाराएं हैं।
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA): इसने 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) का स्थान लिया। इसमें 170 धाराएं हैं।
2. प्रमुख क्रांतिकारी सुधार व नई धाराएं
- राजद्रोह (Sedition) की समाप्ति: ब्रिटिश कालीन कुख्यात 'राजद्रोह' (धारा 124A IPC) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को धारा 152 BNS के तहत दंडनीय बनाया गया है।
- सामुदायिक सेवा (Community Service): भारतीय आपराधिक न्यायशास्त्र में पहली बार छोटे अपराधों (जैसे ₹5,000 से कम की चोरी, मानहानि, लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) में जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा का दंड अनिवार्य किया गया है।
- मॉब लिंचिंग व संगठित अपराध: जाति, लिंग या धर्म के आधार पर 5 या अधिक व्यक्तियों द्वारा हत्या (Mob Lynching) करने पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।
- आतंकवाद की पहली बार स्पष्ट परिभाषा: BNS की धारा 113 में पहली बार सामान्य आपराधिक कानून के भीतर 'आतंकवादी कृत्य' को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
3. नागरिक सुविधाएं व डिजिटल फॉरेंसिक अनिवार्यता
अब किसी भी पुलिस स्टेशन में क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज कराई जा सकती है, जिसे 15 दिनों में संबंधित थाने को भेजना अनिवार्य है। 7 वर्ष या अधिक कारावास वाले सभी गंभीर अपराधों के घटनास्थल पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों का जाना और तलाशी व जब्ती की अनिवार्य वीडियोग्राफी करना अनिवार्य कर दिया गया है। ई-समन और डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता दी गई है।